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 मुंबई ,) फिल्म “पल पल दिल के पास” से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरूआत कर रहे बॉलीवुड के ही मैन धर्मेन्द्र का पोता और सनी देओल का बेटा करण देओल आत्मविश्वास से लबरेज है। मैं उन्हें करियर तथा जीवन में कामयाबी की शुभकामनाएं देता हूं।
धर्मेन्द्र ने कहा, “ करण आत्मविश्वास से लबरेज हैं और मैं चाहता हूं कि वह इसी आत्मविश्वास के साथ आसमान की ऊंचाइयों को छुएं। बॉलीवुड फिल्मकार अनिल शर्मा के पुत्र उत्कर्ष भी फिल्म जीनियस से बॉलीवुड में शुरूआत कर रहे हैं। धर्मेंद्र ने उत्कर्ष को भी बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा, ‘मैं उत्कर्ष को बधाई देना चाहता हूं कि वह इस फिल्म से अपनी अभिनय पारी शुरू करने जा रहे हैं।मैं उन्हें सलाह दूंगा कि वह विनम्र बने रहें और कड़ी मेहनत करते रहें तथा प्रसिद्धि से कभी प्रभावित न हों।लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश करें।

 

 मुंबई, फरहान अख्तर और दिशा पटानी को लेकर फिल्म बनाने जा रहे हैं। बॉलीवुड के जाने माने फिल्मकार आशुतोष गोवारिकर,
पिछले साल ऋतिक रोशन को लेकर मोहनजोदाड़ो बनायी, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह नकार दी गयी थी।वह अब एक और फिल्म बनाने जा रहे हैं जिसका टाइटिल हनीमून रखा गया है।इसके लिए उन्होंने फरहान अख्तर को साइन कर लिया है।वह अपनी इस फिल्म में फरहान के अपोजिट दिशा पाटनी को साइन करना चाहते है। बताया जाता है कि दिशा शुरू से ही आशुतोष की फैन रही हैं और वह उनके निर्देशन में काम करना चाहती थीं।
‘एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में दिशा को देख कर उनके स्क्रीन प्रजेंस के कायल हुए आशुतोष की माने तो दिशा का स्क्रीन प्रजेंस जबरदस्त है। दिशा के पास कई फिल्मों के ऑफर हैं ऐसे में आशुतोष, दिशा पाटनी को अपनी फिल्म के लिए साइन कर पाएंगे या नहीं यह सवाल अभी तक कायम है।

 

 

 

मुंबई ; बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा का कहना है कि वह अब आलोचनाओं से नहीं डरती। परिणिति ने कहा कि उनके काम की आलोचना करने वाले लोग उन्हें पसंद आते हैं। फिल्म 'मेरी प्यारी बिंदु' के बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलने पर उन्हें पता था कि उनके काम पर लोग उंगलियां उठाएंगे और इसके लिए वह तैयार भी थी। परिणीति ने बताया कि शुरुआत में उन्हें आलोचना से डर लगता था और वह घबरा जाती थी लेकिन अब उन्हें समझ में आ गया है कि आलोचना भी बॉलीवुड का अभिन्न हिस्सा है और आलोचना से वह सीखती हैं ।परिणीति का कहना है कि बॉलीवुड उसी तरह है जैसे दूर के ढोल सुहावने लगते आते हैं।
परिणीति चोपड़ा की हाल ही में प्रदर्शित फिल्म 'मेरी प्यारी बिंदु' बॉक्स ऑफिस पर पिट गयी है लेकिन परिणीति का मनोबल अभी भी बना हुआ है। परिणीति ने यह भी बताया कि बॉलीवुड की इस चमकती-दमकती दुनिया में हमेशा खूबसूरत दिखने का दबाव होता है जो बहुत मुश्किल भरा काम है।

 

अभिनेता रितिक रोशन और उनकी एक्स वाइफ सुजैन खान का तलाक हो चुका है और दोनों अलग-अलग ही रहते हैं, लेकिन खबर है कि रितिक ने अपने घर से कुछ ही दूरी पर सुजैन के लिए एक नया घर खरीदा है। ऐसा तो नहीं कि रितिक जमाने को दिखाने के लिए तलाक ले चुके हैं जबकि सच में वो अपने बीबी और बच्चों का पूरा-पूरा ख्याल रख रहे हैं।

रितिक ने सुजैन के लिए जो घर खरीदा है वह उनके घर से महज 15 मिनट की दूरी पर स्थित है। यह वही एरिया है जहां रितिक और सुजैन के पैरेंट्स भी रहते हैं। वैसे यह सही है कि खाली समय रितिक अपने दोनों बेटों रेहान और रिधान के साथ ही बिताते हैं। ऐसा करके रितिक अपने फैंस को तलाक की ही तरह कोई और नया झटका तो नहीं देने वाले हैं

दुनिया में अपनी खूबसूरती का लोहा मनवा चुकीं ऐश्वर्या राय बच्चन को काफी लंबे समय के बाद कान फिल्म फेस्टीवल में जब लोगों ने देखा तो वो यह कहने से खुद को रोक नहीं सके कि यह तो कोई सिंड्रेला या बॉर्बी डॉल है। ऐश्वर्या 70वें कान फ़िल्म समारोह में जब रेड कार्पेट पर आईं तो हर नज़र उनकी खूबसूरती निहाती हुई नजर आई।

वैसे तो यह 15वां साल है जब ऐश्वर्या कान पहुंची हैं, लेकिन इस बार कुछ खास जरूर रहा जिसने सभी का ध्यान उनकी ओर खींच लिया। दरअसल उनकी ड्रेस कुछ इस तरह डिजाइन की हुई थी कि देखने वालों को ऐश्वर्या किसी सिंड्रेला या बॉर्बी डॉल की तरह नजर आईं और लोगों ने उनकी तारीफ में कसीदे पढ़ना शुरू कर दिए। 

मुंबई। अभिनेता इरफान खान का मानना है कि हॉलीवुड और क्षेत्रीय भाषाओं की शानदार फिल्मों के बीच अपना वजूद कायम रखने के लिए हिंदी सिनेमा को अपना लेवल ऊपर उठाने की जरूरत है। इरफान ने कहा, ''सिनेमा बदल रहा है और इसके दर्शक ज्यादा परिपक्व हो रहे हैं। अगर आप अच्छी कहानी वाली फिल्में बना सकते हैं, तो फिल्म को दर्शक हमेशा अच्छी प्रतिप्रिया देंगे।''

उन्होंने कहा, ''लेकिन अब मुझे लगता है कि हिंदी सिनेमा को अपना स्तर ऊपर उठाने की जरूरत है, क्योंकि एक तरफ जहां हॉलीवुड हिंदी सिनेमा के बिजनेस को प्रभावित कर रहा है वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय भाषा कि फिल्में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।'' अभिनेता को लगता है कि `बाहुबली' जैसी दक्षिण भारतीय फिल्मों में भारत के पूरे बाजार पर कब्जा करने की क्षमता है, इसलिए हिंदी सिनेमा को वास्तव में अच्छे विषयों के साथ आने की जरूरत है।

इरफान के अनुसार, ''उन्हें दर्शकों को अच्छी कहानियों के जरिए आकर्षित करने की कोशिश करनी चाहिए वरना उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।'' फिल्म के निर्माताओं ने हिंदी माध्यम के विद्यालयों के शिक्षकों के लिए फिल्म की स्प्रीनिंग आयोजित की थी। फिल्म `हिंदी मीडियम' ने देश में अंग्रेजी भाषा बोलने के प्रति बढ़ते लगाव जैसे मुद्दे को छुआ है। इस बारे में इरफान ने कहा कि अंग्रेजी भाषा जरूरत बन गई है और वह अंग्रेजी भाषा के खिलाफ नहीं हैं। लोगों को ज्यादा से ज्यादा भाषाओं को सीखने की कोशिश करनी चाहिए लेकिन अपनी मातृभाषा पर गर्व भी करना चाहिए।

इरफान ने भारत में शिक्षा के मौजूदा हालात पर कहा कि आजकल पढ़ाई ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक हो गई है और बच्चों के लिए स्कूली पढ़ाई ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उन्हें निजी कक्षाओं में अपनी पढ़ाई के लिए अतिरिव्त समय की जरूरत होती है। भारत में सरकारी सहायता से संचालित स्कूलों में शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है और अगर यह बेहतर हो जाता है तो फिर राष्ट्र भाषा को अपनी जगह बनाए रखने में मदद मिल सकती है। 

मुंबई । एशियाई बाजारों में बढ़त के साथ कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान का बाजार निक्कई 0.1 फीसदी गिरा है, लेकिन हैंग सेंग 60 अंक बढ़कर 25,450 के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं एसजीएक्स निफ्टी 26.5 अंक की तेजी के साथ 9,475.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

स्ट्रेट्स टाइम्स में 0.4 फीसदी की मजबूती दिख रही है, जबकि कोरियाई बाजार का इंडेक्स कोस्पी 0.7 फीसदी तक मजबूत हुआ है। ताइवान इंडेक्स में 0.15 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। शंघाई कम्पोजिट में 0.2 फीसदी की कमजोरी दिख रही है।

मुंबई। वैश्विक बाजारों से मिले खराब संकेतों के कारण देश के शेयर बाजारों में मंगलवार के कारोबारी दिन कमजोरी के साथ कारोबार देखने को मिल रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में 0.5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। कमजोरी के इस माहौल में निफ्टी 9400 के करीब आ गया है, जबकि सेंसेक्स में 100 अंकों की गिरावट आई है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार बिकवाली दिख रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 1.6 फीसदी गिर गया है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में भी 1.5 फीसदी की कमजोरी आई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 1.5 फीसदी लुढ़क गया है।

फार्मा, मेटल, एफएमसीजी, कंज्यूमर डयुरेबल्स, पावर और ऑयल एंड गैस शेयरों में बिकवाली हावी हुई है। बैंक निफ्टी 0.4 फीसदी गिरकर 22,565 के स्तर पर आ गया है। हालांकि आईटी शेयरों में अच्छी खरीदारी नजर आ रही है। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 105 अंक की गिरावट के साथ 30,466 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 42 अंक की कमजोरी के साथ 9,396 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। 

बाजार में कारोबार के इस दौरान दिग्गज शेयरों में सन फार्मा, गेल, अरविंदो फार्मा, अदानी पोर्ट्स, सिप्ला और एसबीआई 5.7-2.2 फीसदी तक टूटे हैं। हालांकि दिग्गज शेयरों में मारुति सुजुकी, एचसीएल टेक, टीसीएस, एचडीएफसी, विप्रो और एचयूएल 1.25-0.6 फीसदी तक बढ़े हैं। 

मिडकैप शेयरों में वीडियोकॉन, रिलायंस कम्युनिकेशंस, हैवेल्स इंडिया, अदानी पावर और बैंक ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा 20-4 फीसदी तक कमजोर हुए हैं। स्मॉलकैप शेयरों में भूषण स्टील, डेन नेटवर्क्स, तानला सॉल्यूशंस, शक्ति पंप्स और सुप्रीम इंफ्रा सबसे ज्यादा 15.3-7.8 फीसदी तक लुढ़के हैं।

नई दिल्ली ।  पुरानी कंपनियां भारती एयरटेल, वोडाफोन तथा आइडिया ने मार्च में उचित लाइसेंस शुल्क नहीं दिया जिससे सरकार को 400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। यह आरोप रिलायंस जियो ने दूरसंचार मंत्रालय के समक्ष शिकायत दर्ज कर लगाया है। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी ने आरोप लगाया कि उक्त तीनों कंपनियों ने लाइसेंस नियमों का उल्लंघन किया और जानबूझकर 2016-17 की अंतिम तिमाही का अग्रिम लाइसेंस शुल्क अनुमानित समायोजित सकल आय के आधार दिया जो तीसरी तिमाही से कम था।

लाइसेंस समझौते के तहत चौथी तिमाही की राशि तीसरी तिमाही के भुगतान से कम नहीं होनी चाहिए। शिकायतकर्ता के अनुसार एयरटेल ने जनवरी-मार्च 2017 के लिये लाइसेंस शुल्क के रूप में करीब 950 करोड़ रुपए का भुगतान किया। जियो का आरोप है कि यह राशि एयरटेल द्वारा अक्टूबर-दिसंबर 2017 में दिए गए 1,099.5 करोड़ रुपए के लाइसेंस शुल्क से 150 करोड़ रुपए कम है। 

नियमों के तहत दूरसंचार परिचालक को जनवरी-मार्च अवधि के लिये लाइसेंस शुल्क का भुगतान अनुमानित राजस्व के आधार पर करने की जरूरत थी लेकिन यह इसी वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में किये गये भुगतान से कम नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार जियो के अनुसार वोडाफोन ने 550 करोड़ रुपए का भुगतान किया जो तीसरी तिमाही में दिए गए 746.8 करोड़ रुपए के लाइसेंस शुल्क से 200 करोड़ रुपए कम है।

आइडिया ने तीसरी तिमाही में दिए गए 609.4 करोड़ के मुकाबले 70 करोड़ रुपए कम शुल्क का भुगतान किया। जियो का आरोप है कि इससे सरकारी खजाने को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

नई दिल्‍ली । मूल्‍य आधारित नीलामी के जरिए 3,000 करोड़ रुपये (सांकेतिक) की अधिसूचित राशि के लिए ‘भारत सरकार फ्लोटिंग रेट बांड 2024’एवं मूल्‍य आधारित नीलामी के जरिए 8,000 करोड़ रुपये (सांकेतिक) की अधिसूचित राशि के लिए ‘6.79 प्रतिशत ब्याज वाले सरकारी स्टॉक 2027’ और मूल्‍य आधारित नीलामी के जरिए 2,000 करोड़ रुपये (सांकेतिक) की अधिसूचित राशि के लिए ‘7.73 प्रतिशत ब्याज वाले सरकारी स्टॉक 2034’ तथा मूल्‍य आधारित नीलामी के जरिए 2,000 करोड़ रुपये (सांकेतिक) की अधिसूचित राशि के लिए ‘7.06 प्रतिशत ब्याज वाले सरकारी स्टॉक 2046’ को लेकर भारत सरकार ने फ्लोटिंग रेट बांडों और सरकारी स्‍टॉक की बिक्री (पुनर्निर्गम) करने की घोषणा की है ।

भारतीय रिजर्व बैंक के मुम्‍बई कार्यालय द्वारा ये नीलामियां 26 मई, 2017 (शुक्रवार) को आयोजित की जाएंगी, जिसके लिए एकाधिक मूल्य विधि का उपयोग किया जाएगा। जिसमें कि सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी से जुड़ी गैर-प्रतिस्‍पर्धी बोली सुविधा की योजना के अनुसार स्‍टॉक की बिक्री की अधिसूचित राशि के 5 प्रतिशत तक का आवंटन पात्र व्‍यक्तियों एवं संस्‍थानों को किया जाएगा।

 इस संबंध में बताया गया है कि नीलामी के लिए प्रतिस्‍पर्धी एवं गैर-प्रतिस्‍पर्धी दोनों ही बोलियां 26 मई, 2017 को भारतीय रिजर्व बैंक के कोर बैंकिंग सोल्‍यूशन (ई-कुबेर) सिस्‍टम पर इलेक्‍ट्रॉनिक प्रारूप (फॉर्मेट) में पेश की जानी चाहिए। गैर-प्रतिस्‍पर्धी बोलियां प्रात: 10.30 बजे से लेकर प्रात: 11.30 बजे तक और प्रतिस्‍पर्धी बोलियां प्रात: 10.30 बजे से लेकर दोपहर 12.00 बजे तक पेश की जानी चाहिए।

 इन नीलामियों के नतीजों की घोषणा 26 मई, 2017 को ही कर दी जायेगी और सफल बोली लगाने वालों द्वारा भुगतान 29 मई, 2017 (सोमवार) को किया जायेगा। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप ये स्‍टॉक ‘व्‍हेन इश्‍यूड’ ट्रेडिंग के लिए पात्र माने जाएंगे। इसके लिए दिनांक 16 नवंबर, 2006 को जारी परिपत्र संख्‍या आरबीआई/2006-07/178 देखें, जिसमें समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं।

भारत में इन दिनों विदेशी पर्यटकों की वृद्ध‍ि दर में तेजी से इजाफा हो रहा है । देखाजाए तो जब से केंद्र में भाजपानीत मोदी सरकार आई है, तभी से लगातार आ रहे आंकड़े इस दिशा में चौकानेवाले हैं, क्‍योंकि इसके बाद से देखने में आ रहा है कि विदेशियों को भारत कुछ ज्‍यादा ही रास आ रहा है । इस संबंध में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ओर से रुपये एवं डॉलर दोनों ही लिहाज से भारत में हर महीने पर्यटन के जरिए विदेशी मुद्रा आमदनी (एफईई)  का आकलन करते हुए आंकड़े जारी किए गए हैं, जोकि भारतीय रिजर्व बैंक के भुगतान संतुलन से जुड़े यात्रा प्रमुख के आंकड़ों पर आधारित हैं।

 इसके अनुसार वर्ष 2016 और जनवरी-मार्च 2017 की एफईई (रुपये एवं डॉलर दोनों ही लिहाज से) में संशोधन किया गया है। वर्ष 2016 के विदेशी पर्यटक आगमन के अंतिम आंकड़े को अपनाने के मद्देनजर यह संशोधन किया गया है। वहीं अप्रैल, 2017 और जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान भारत में पर्यटन से एफईई के अनुमानों की मुख्‍य बातें निम्‍नलिखित हैं –

 पर्यटन से विदेशी मुद्रा आमदनी (एफईई) (रुपये में)   

 अप्रैल, 2017 में एफईई 14,692 करोड़ रुपये रही, जबकि अप्रैल, 2016 में यह 11,495 करोड़ रुपये और अप्रैल, 2015 में 10,091 करोड़ रुपये थी। अप्रैल, 2016 के मुकाबले अप्रैल, 2017 में रुपये के लिहाज से एफईई की वृद्धि दर 27.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि अप्रैल, 2015 के मुकाबले अप्रैल, 2016 में यह वृद्धि 13.9 प्रतिशत आंकी गई थी। जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान एफईई 18.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 61,605 करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि जनवरी-अप्रैल 2015 की तुलना में जनवरी-अप्रैल 2016 में यह 15.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 51,812 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी।

 

पर्यटन से विदेशी मुद्रा आमदनी (एफईई) (अमेरिकी डॉलर में)

अप्रैल, 2017 के दौरान अमेरिकी डॉलर के लिहाज से एफईई 2.278 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई, जबकि यह अप्रैल 2016 में 1.726 अरब अमेरिकी डॉलर और अप्रैल 2015 में 1.609 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज की गई थी। अप्रैल 2016 के मुकाबले अप्रैल 2017 में अमेरिकी डॉलर के लिहाज से एफईई की वृद्धि दर 32.0 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल 2015 की तुलना में अप्रैल 2016 में यह वृद्धि 7.3 प्रतिशत रही थी।

जबकि जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान एफईई 20.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9.275 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई, जबकि जनवरी-अप्रैल 2015 की तुलना में जनवरी-अप्रैल 2016 में यह 6.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7.697 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज की गई थी।   

 

दिल्‍ली । भारत संसाधनों की दृष्‍ट‍ि से कितना समृद्ध है इसका अंदाजा आप सिर्फ खनिज क्षेत्र के आंकड़ें देखकर ही लगा सकते हैं । केंद्र सरकार की ओर से इस बात के आंकड़े जारी किए गए हैं, जिन्‍हें सभी को जरूर जानना चाहिए । मार्च 2017 (नई सीरीज (2011-12=100) में खनन एवं उत्खनन क्षेत्र का खनिज उत्पादन सूचकांक 127.2 अंक रहा, जो मार्च 2016 के मुकाबले 9.7 फीसदी ज्यायदा है। वर्ष 2016-17 की अप्रैल–मार्च अवधि में इस क्षेत्र की संचयी वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.3 फीसदी रही।

 उधर, खनिज मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि मार्च, 2017 के दौरान देश में कुल मिलाकर 26350 करोड़ रुपये मूल्य के खनिजों का उत्पादन हुआ, जिसमें परमाणु एवं लघु या गौण खनिज शामिल नहीं हैं। इसमें कोयले का सर्वाधिक 11658 करोड़ रुपये (44 फीसदी) का योगदान रहा। इसके बाद अहमियत के लिहाज से क्रमश: इन खनिजों का योगदान रहा: पेट्रोलियम (कच्चा)- 5616 करोड़ रुपये, लौह अयस्क- 2960 करोड़ रुपये, प्राकृतिक गैस (उपयोग की गई) - 2214 करोड़ रुपये, लिग्नाइट- 996 करोड़ रुपये और चूना पत्थर- 639 करोड़ रुपये। मार्च, 2017 के दौरान खनिजों के कुल उत्पादन में मूल्य के लिहाज से इन छह खनिजों का कुल योगदान तकरीबन 91 फीसदी का रहा।

 वहीं, मार्च, 2017 में महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन कुछ इस प्रकार रहा: कोयला- 770 लाख टन, लिग्नाइट- 55 लाख टन, प्राकृतिक गैस (उपयोग की गई)- 2677 मिलियन क्यूबिक मीटर, पेट्रोलियम (कच्चा)- 31 लाख टन, बॉक्साइट- 1875 हजार टन, क्रोमाइट-793 हजार टन, कॉपर कॉन्स. (तांबा सान्द्र)- 13 हजार टन, सोना - 127 किलो, लौह अयस्क- 196 लाख टन, सीसा सान्द्र- 31 हजार टन, मैंगनीज अयस्क- 298 हजार टन, जिंक कॉन्स (जस्ता सान्द्र)- 181 हजार टन, एपेटाइट और फॉस्फोराइट- 108 हजार टन, चूना पत्थर- 304 लाख टन, मैग्नेसाइट- 17 हजार टन और हीरा – 5026 कैरेट।

 गौरतलब है कि मार्च 2017 के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों की उत्पादन वृद्धि दर मार्च, 2016 की तुलना में सकारात्मक या धनात्मक रही। इनमें क्रोमाइट (85.4%), जस्ता सान्द्र (41.4%), हीरा (25.5%), एपेटाइट और फॉस्फोराइट (17.0%), मैंगनीज अयस्क (12.3%), लौह अयस्क (11.7%), सीसा सान्द्र (11.5%), कोयला (10.9%), उपयोग की गई प्राकृतिक गैस (9.9%), चूना पत्थर (4.2%) और कच्चा पेट्रोलियम (0.9%) शामिल हैं। कई अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की उत्पादन वृद्धि दर नकारात्मक रही। इनमें मैग्ने्साइट (-34.7%), सोना (-13.6%), तांबा सान्द्र (-6.5%), लिग्नाइट (-4.2%) और बॉक्साइट (-4.0%) शामिल हैं।

नई दिल्ली। चीनी कंपनी शाओमी ने पहले ऑफलाइन स्टोर मी होम को भारत में 11 मई को लांच किया गया था। बैंगलूर के फिनिक्स मार्केट सिटी मॉल स्थित कंपनी के पहले ऑफलाइन स्टोर को आम ग्राहकों के लिए पिछले शनिवार 20 मई को खोला गया था। स्टोर खुलने के चंद घंटों में ही कंपनी ने 5 करोड़ रुपए के प्रोडक्ट बेचे।

 शाओमी का कहना है कि उसके 12 घंटे में स्टोर से 5 करोड़ रुपए के प्रोडक्ट बिके। माना जा रहा है कि भारत के ऑफलाइन स्मार्टफोन कंपनियों में आज तक ऐसा देखने को नहीं मिला है। शाओमी के मुताबिक मी होम के खुलते ही लगभग 10 हजार फैन्स स्टोर पर आए और फोन सहित दूसरे प्रोडक्ट्स की खरीदारी की है।

मुंबई ! शिओमी  रेडमी 4 की पहली ऑफर सेल 23 मई दोपहर 12 बजे से अमेजिंग पर शुरू होने जा रही है। यह डिवाइस कंपनी के स्टोर पर भी मंगलवार से उपलब्ध होगी। 16 मई को रेडमी 4 तीन वेरिएंट में लांच हुआ था।

बतादें कि इसमें 2जीबी रैम और 16 जीबी इंटरनल स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत 6,999 रुपया रखी गई है। वही 3 जीबी रैम और 32जीबी इंटरनल स्टोरेज वाला मॉडल 8,999 रुपए में तथा 4जीबी रैम के साथ 64 जीबी इंटरनल मेमोरी वाला फोन 10999 रुपए में उपलब्ध होगा।

अब यह सर्च इंजन यह भी बताएगा कि कहां कैसे जॉब्स उपलब्ध हैं। दरअसल, बढ़ते रोजगार के संकट को देखते हुए गूगल नया टूल बनाने जा रहा है, इस टूल की मदद से कंपनियां और नौकरी चाहने वाले एक-दूसरे से जुड़ पाएंगे। जिसे 'गूगल फॉर जॉब्स' नाम दिया गया है।

दिलचस्प है कॉन्सेप्ट
यह कॉन्सेप्ट थोड़ा अलग और चिलचस्प है। गूगल यहां-वहां उपलब्ध नौकरियों की अपनी लिस्ट बनाने के बजाए फेसबुक, लिंक्डइन, मॉन्सटर, कैरियरबिल्डर और अन्य के साथ मिलकर काम करेगी और वहां नए जॉब्स से जुड़ी उनकी जानकारी अपने यूजर्स तक पहुंचाएगी।
करियर शुरू करने वालों से लेकर स्पेशलाइजेशन हासिल कर चुके लोगों तक के लिए जॉब्स होंगे। नौकरियों को अलग-अलग श्रेणियों में छांटने का काम आर्टिफिशियल एंजेलिजेंस और मशीन लर्निंग से होगा। इससे यूजर्स को जॉब्स की सटीक लिस्ट मिलेगी।
अभी तय नहीं है कि यह टूल कब लांच होगा, लेकिन माना जा रहा है कि हर गूगल यूजर के लिए उपलब्ध होने वाले इस टूल की शुरुआत आने वाले हफ्तों में कर दी जाएगी।

 

गूगल पिक्सल स्मार्टफोन की सफलता के बाद अब कंपनी पिक्सल-2 स्मा‍र्टफोन डवलप कर रही है। यह फोन next generation मोबाइल होगा तथा इसका दाम मौजूदा पिक्सल के मुकाबले काफी कम होगा।
कहा जा सकता है कि गूगल पिक्स्ल-2 एक बजट फोन होगा। इस फोन को इसी साल लॉन्च किया जाएगा। इस फोन का सबसे खास फीचर इसका कैमरा होगा।ऐसी खबर है कि नया पिक्सल फोन वाटरप्रूफ हो सकता है। इसकी टेस्टिंग स्नैपड्रैगन 83X चिपसेट के साथ हो रही है।
गौरतलब है कि ये सभी शुरुआती जानकारियां हैं तथा गूगल की ओर से ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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स्मार्टफोन दिग्गज कंपनी सैमसंग अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन गैलेक्सी S8 और गैलेक्सी S8 प्लस को लेकर काफी दिनों से चर्चा में है। गैलेक्सी S8 के प्री-ऑर्डर की संख्या पिछले गैलेक्सी S7 को भी पार कर गई है। इन स्मार्टफोन की प्री-बुकिंग्स शुरू हो चुकी है।, सिर्फ 2 दिनों में इसकी संख्या 5,50,000 पार कर चुकी थी।
सैमसंग के मोबाइल कम्युनिकेशंस बिजनेस के अध्यक्ष डॉन्ग-जिन कोह ने बताया कि, घरेलू बाजार में 7 दिनों में फ्लैगशिप स्मार्टफोन गैलेक्सी S8 के प्री-ऑर्डर की संख्या 7,20,000 से भी ज्यादा हो गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि गैलेक्सी S8 और गैलेक्सी S8 प्लस भारत में 19 अप्रैल को लॉन्च हो सकता है।
सैमसंग गैलेक्सी S8 और S8 प्लस के फीचर्स:
सैमसंग गैलेक्सी एस8 में 5.8 इंच का क्वाडएचडी+ (1440x2960 पिक्सल) सुपर एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है। वहीं, सैमसंग गैलेक्सी एस8+ में 6.2 इंच का क्वाडएचडी+ (1440x2960 पिक्सल) सुपर एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है। कंपनी ने इन्हें इनफिनिटी डिस्प्ले का नाम दिया है।
कैमरे की अगर बात करे तो दोनों ही स्मार्टफोन में 12 MP के 'डुअल पिक्सल' रियर कैमरे हैं। इसके साथ 8 MP का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है। है। दोनों ही स्मार्टफोन 4 GB रैम और 64 GB स्टोरेज के साथ आते हैं, जिन्हें 256 GB तक के माइक्रोएसडी कार्ड के जरिये बढ़ाया जा सकता है।

आने वाले दिनों में सीधे फेसबुक एप का इस्तेमाल करते हुए खाना ऑर्डर करना संभव हो सकेगा। ऑर्डर के लिए यूजर को किसी रेस्टोरेंट के एप या वेबसाइट पर नहीं जाना पड़ेगा। फेसबुक ने पिछले साल अक्टूबर में इस दिशा में कदम उठाते हुए डिलीवरी डॉट कॉम और स्लाइस से गठजोड़ किया था। दुनिया के सबसे ज्यादा प्रसिद्ध वाट्सएप, इंस्टाग्राम और मैसेंजर भी फेसबुक के ही अधीन हैं। ऐसे में यह नई सुविधा फेसबुक के एक्टिव यूजर्स की संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
इसी गठजोड़ के जरिये यूजर को खाना ऑर्डर करने की सुविधा मिलेगी। उल्लेखनीय है कि फेसबुक बहुत तेजी से बढ़ती हुई सोशल साइट है। इस पर हर महीने करीब दो अरब एक्टिव यूजर रहते हैं।हालांकि अभी यह सुविधा अमेरिका में कुछ सीमित लोगों को ही मिलेगी। भविष्य में इसका विस्तार किए जाने की उम्मीद है।

 

एचआईवी पीड़ित महिलाएं अब मातृत्व के लिए श्राप नहीं रह गई है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों ने मां के एचआईवी संप्रमण से उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का बचाव करना मुमकिन कर दिया है। इसलिए एक गर्भवती महिला को मातृत्व का आनंद लेने के लिए एचआईवी की जांच भी जरूर करवा लेनी चाहिए।

एड्स रोग विशेषज्ञ यह सुझाव देते हैं कि प्रत्येक गर्भवती महिला को एचआईवी की जांच करानी चाहिए, ताकि खुशियों भरे इन पलों में इंफेक्शन फैलने से रोका जा सके। गर्भावस्था हर महिला के लिए एक सुंदर समय है। हर गर्भवती महिला चाहती है कि उसका बच्चा पूर्णत: स्वस्थ रूप और रोगमुव्त जन्म ले। इसके लिए हमेशा यह सुझाव दिया जाता है कि सभी महिलाएं, जो गर्भवती हैं या गर्भवती होने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें अपने साथियों को भी एचआईवी का परीक्षण कराने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

बतादें कि एचआईवी से संप्रमित मां से उसके बच्चे में एचआईवी तीन प्रकार से स्थानांतरित हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान, योनि से बच्चे के जन्म के दौरान, स्तनपान के माध्यम से। प्रसव के पहले और उसके बाद की दवाएं और निदान को केवल एड्स रोग विशेषज्ञ की निगरानी में किया जाना चाहिए। 

ज्यादा या अज्ञात एचआईवी वाइरस वाली महिलाओं के लिए मां से बच्चे में इसके प्रसारित होने के जोखिम को कम करने के लिए सीजेरियन (सी-सेक्शन) डिलिवरी का सुझाव दिया जाता है। एचआईवी स्तनपान से भी फैल सकता है, इसलिए एचआईवी से संप्रमित महिलाओं को सुझाव दिया जाता है कि वे अपने बच्चों को स्तनपान न कराएं। स्तन के दूध की जगह उन्हें नवजातों का फार्मूला दूध देने का सुझाव दिया जाता है जिसमें पाउडर व दूध होता है। बच्चे को स्तन का दूध दिया जाए या फार्मूला दूध, इसका निर्णय आपके स्वास्थ्य विशेषज्ञ ही कर सकते हैं।

एचआईवी से संप्रमित महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चों को जन्म के बाद 6 से 12 घंटे के अंदर जिडोवुडिन नामक एचआईवी दवा दी जाती है। बच्चे के जन्म के समय मां से उसमें एचआईवी वायरस प्रसारित होने की स्थिति में यह दवा फिर से बच्चे की सुरक्षा करती है।

नर्चर आईवीएफ सेंटर की गायनोक्लॉजिस्ट ड़ॉ अर्चना धवन बजाज बताती हैं, एचआईवी से पीड़ित महिलाओं की सफलतापूर्वक डिलिवरी बहुत चुनौतीपूर्ण नहीं है, बल्कि मां के एचआईवी से पीड़ित होने पर भी एक सेहतमंद बच्चे का जन्म कराना काफी हद तक संभव है। इसके लिए आजकल कई सुरक्षित तरीके हैं, जैसे सी-सेक्शन प्रसव, बच्चे में एचआईवी वायरस जाने से रोकने के लिए दी जाने वाली दवाएं। समय की मांग केवल यह समझना है कि एक गर्भवती महिला के लिए यह जानना कितना महत्वपूर्ण है कि वह इससे संप्रमित है या नहीं और वह एचआईवी की जांच करवाएं। समय-समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना और उचित देखभाल डिलिवरी के बाद किसी अन्य जटिलता से सुरक्षा करने में मदद कर सकती है।

बगैर किसी चेतावनी के पड़ने वाले दिल का दौरा के बारे में हार्ट विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। पर्यावरण मंत्री अनिल दवे की 60 साल में और बॉलीवुड अदाकारा रीमा लागू की 59 साल की उम्र में अचानक मृत्यु होने से, दवे को हृदय से जुड़ी गंभीर समस्या होने के बारे में कोई संकेत नहीं था। उन्होंने देर रात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक बैठक की थी। वहीं, रीमा के परिवार ने बताया कि उनके साथ स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या नजर नहीं आ रही थी।

हार्ट विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीयों में जीवन प्रत्याशा बढ़ी है जबकि युवावस्था में ही लोगों को दिल के दौरे पड़ रहे हैं। एम्स के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ संदीप मिश्रा ने बताया कि 55 साल की आयु के नीचे करीब 50 फीसदी भारतीय दिल का दौरा पड़ने से ग्रसित हैं जबकि 25 फीसदी दिल का दौरा पड़ने का मामला 40 साल से नीचे के उम्र में है। इसलिए यह आत्मावलोकन करने और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव की मांग करता है।

चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि व्यायाम नहीं करने के चलते मधुमेह, मोटापा और उच्च रव्तचाप जैसे रोग होते हैं जो दिल का दौरा पड़ने की वजह हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तंबाकू ने इस जोखिम को और बढ़ाया है। ड़ॉ मिश्रा ने कहा कि हम संप्रामक रोगों को काबू कर मृत्यु दर में कमी लाने में सक्षम रहे हैं लेकिन जीवनशैली से जुड़ी मौतें बढ़ रही हैं।

सर गंगा राम अस्पताल के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ जेपीएस साहने के मुताबिक, भारत में जिन लोगों को हृदय रोग है या जिन्हें दिल का दौरा पड़ा है, वे पश्चिमी देशों में इसी तरह की समस्या वाले लोगों की तुलना में आठ से 10 साल छोटे हैं। उन्होंने कहा कि 50 फीसदी मामलों में बगैर चेतावनी के दिल का दौरा पड़ता है।

चिकित्सकों ने कहा कि भारत में समय से पहले दिल का दौरा पड़ने की एक अहम वजह `हाइपरकोलेस्टेरोलेमिया' है जो एक आनुवांशिक स्थिति है। यह उच्च कॉलेस्टेरोल की वजह है। व्यायाम और एक अच्छा आहार और तनाव नहीं लेना या धूम्रपान नहीं करना, कुछ ऐसी चीजें हैं जो हृदय से जुड़ी समस्याओं से बचा सकती हैं। 

ये संभव नहीं है कि आप ओवरवेट भी हों और हेल्दी भी हों। बाकिंमघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा 3.5 मिलियन ब्रिटेनवासियों पर हुई रिसर्च के मुताबिक, अगर आपका मेटाबॉलिक हेल्दी भी हैं तो भी मोटे लोगों को हार्ट डिजीज का हाई रिस्क और स्ट्रोक का खतरा रहता है। खासतौर पर सामान्य वजन वाले लोगों से ज्यादा।

मोटे हैं लेकिन मेटाबॉलिक हेल्दी है तो ऐसे में अगर आप सोचते हैं, फैटी हैं लेकिन फिट है तो आप गलत हैं। मोटे लोग यानि जिनका क्लीनिकली बॉडी इंडेक्स वेट (बीएमआई) अधिक है। दरअसल, मोटे लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में दिक्कत होती है। 1995 से 2015 के बीच 18 साल से अधिक उम्र के लोगों पर रिसर्च हुई।

रिसर्च में भाग लेने वाले 3।5 मिलियन ब्रिटेनवासियों को कार्डेयोवस्कुलर डिजीज़ नहीं थी। सभी प्रतिभागियों को उनके बीएमआई, डायबिटीज लेवल, ब्लड प्रेशर लेवल और एब्नॉर्मल ब्लड फैट हाइपरलिपिडिमिया के हिसाब से दो ग्रुप्स में बांटा गया। ये ध्यान रखा गया कि प्रतिभागियों को इनमें से कोई भी दिक्कत ना हो। इसके बाद शोधकर्ताओं ने सामान्य लोगों और मोटे लोगों और मेटाबॉलिकली हेल्दी मोटे लोगों के बीच कोरोनरी हार्ट डिजीज़, स्ट्रोक, हार्ट फेल्योर के खतरे को लेकर तुलना की।

रिसर्च के नतीजों में पाया गया कि सामान्य लोगों कि तुलना में 50 फीसदी ओवरवेट लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज़ का रिस्क था। वहीं 7 फीसदी रिस्कस्ट्रोक और हार्ट फेल्योर का था। जबकि मेटाबॉलिकली हेल्दी मोटे लोगों में हार्ट फेल्योर का रिस्क कम था। लेकिन बाकी हार्ट डिजीज का रिस्क अधिक था। बहरहाल, बाद में शोध में चेन स्मोकर्स को भी शामिल किया गया।

रिसर्च में पाया गया कि सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में चेन स्मोकर्स को हार्ट डिजीज़ का खतरा अधिक रहता है। रिसर्च के शोधकर्ता ऋषि का कहना था कि मेटाबॉलिकली हेल्दी मोटे लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज़, हार्ट फेल्योर और स्ट्रोक का खतरा सामान्य  वजन वाले लोगों से कहीं अधिक था। ऐसे में लोगों को अपने वजन पर कंट्रोल करना चाहिए। हालांकि मेटाबॉलिकली हेल्दी मोटापा बहुत ज्यादा हार्मफुल नहीं है। 

रिसर्च की इस दुनिया में रोज नए रिसर्च होते रहते हैं इस रिसर्च में एक ओर रिसर्च हुआ है। यूं तो महिलाओं और पुरुषों के लिए बाजार में बहुत से कंट्रासेप्शन ऑप्शंस मौजूद हैं लेकिन अब पुरुषों के लिए ऐसा हर्बल कंट्रासेप्शन आ गया है, जिसके साइड इफेक्ट्स नहीं है।

जी हां, हाल ही में आई एक रिसर्च में पुरुषों के लिए एक ऐसे हर्बल गर्भनिरोधक को तैयार करने का दावा किया गया है जिसके साइड इफेक्ट्स ना होने की बात की जा रही है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये गर्भनिरोधक कुछ खास किस्म के पौधों को मिलाकर बनाया गया है,ये पिल मानग आफ्टर पिल की तरह ही काम करेगी, बेशक पुरुषों के लिए कंडोम मौजूद है लेकिन फिर भी एक रिसर्च के मुताबिक, अधिकतर पुरुष कंडोम का इस्तेमाल करने से कतराते हैं, ऐसे में ये पिल पुरुषों के लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि ये गर्भनिरोधक फीमेल गर्भनिरोधक की तरह ही काम करेगी, हालांकि शोधकर्ता दावा कर रहे हैं कि इसके साइड इफेक्ट नहीं हैं। वहीं जब रिसर्च के दौरान प्रतिभागियों को ये कंट्रासेप्टिव दी गई तो उन्होंने में मूड में उतार-चढ़ाव और पिंपल्स हो जाने जैसी समस्याओं की शिकायत की।

उधर, इसे लेकर नेशनल एकडमी ऑफ साइंस में पब्लिश इस रिसर्च में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलफोर्निया के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस मेल कंट्रासेप्टिव पिल में एक ऐसा तत्व शामिल है जो कि फर्टाइल सेशन ब्लॉक कर देता है, मेल फर्टिलिटी के लिए स्पर्म के कैल्शियम चैनल कैटस्पर का होना जरूरी है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि  कैटस्पर प्रोजेस्टेरॉन हॉर्मोन के कॉन्टेक्ट में आते ही एक्टिव हो जाते हैं, इस पिल पर टेस्ट के दौरान शोधकर्ता जानना चाहते थे कि क्या सचमुच ये पिल कैटस्पर यानि फर्टाइल सेशन को ब्लॉक कर सकता है या नहीं। 

नियमित व्यायाम से आपके शरीर में शप्रियता लाने के साथ-साथ अतिरिव्त बसा को दूर करके वजन को भी घटाया जा सकता है। व्यायाम से अस्थिमज्जा में जमा हो रहे वसा को घटाने में कारगर है और इससे हड्डी की गुणवत्ता कुछ सप्ताह में ही सुधारी जा सकती है।

 एक ताजा शोध में बताया गया है कि मोटापे के शिकार व्यव्तियों में हड्डी की गुणवत्ता बेहद खराब होती है। वे अपने दुर्बल समकक्षों की तुलना में अपनी हड्डियों को व्यायाम से ज्यादा स्वस्थ रख सकते हैं। अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर माया स्टेनर ने कहा कि इस शोध के प्रमुख निष्कर्ष में से एक यह है कि व्यायाम न केवल समूचे शरीर के लिए, बल्कि हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।

 स्टेनर ने कहा कि बहुत ही थोड़े समय में हमने देखा कि दौड़ने वाले चूहों की हड्डियां बहुत ही स्वस्थ थीं। हालांकि, चूहों पर किया गया शोध सीधे तौर पर मानव स्थितियों पर लागू नहीं होता, लेकिन जो स्टेम कोशिकाएं चूहों में हड्डी बनाती हैं, वह ठीक मानव में हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं की तरह ही होती हैं। स्टेनर ने बताया कि व्यायाम से हड्डी ज्यादा मजबूत होती है। 

आधुनिक जीवन शैली और दोषपूर्ण खान-पान के चलते विश्वभर में हर साल लाखों लोग केंसर जैसे बीमारी की चपेट में आ रहे है और असमय ही काल कवलित हो जाते है, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के बाकी देशों के मुक़ाबले भारत में केंसर रोग से प्रभावितों की दर कम होने के बावजूद यहाँ 15 प्रतिशत लोग केंसर के शिकार होकर अपनी जान गवा देते है। डब्लू एच्चों की ताज़ा सूची के मुताबिक 172 देशों की सूची में भारत का स्थान 155वां हैं। 

सूची के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां केंसर से होने वाली मौत की दरें सर्वाधिक कम है। फिलहाल भारत में यह प्रतिलाख 70.23 व्यक्ति है। डेन्मार्क जैसे यूरोपीय देशों में यह संख्या दुनिया में सर्वाधिक है यहाँ केंसर प्रभावितों की दर प्रतिलाख 338.1 व्यक्ति है। भारत में हर साल केंसर के 11 लाख नए मामले सामने आरहे है ।राष्ट्रीय केंसर संस्थान के एक प्रतिवेदन के अनुसार देश मे हर साल इस बीमारी से 70 हजार लोगों की मृत्यु हो जाती है इनमें से 80 प्रतिशत लोगो के मौत का कारण बीमारी के प्रति उदासीन रवैया है। उन्हें इलाज़ के लिए डॉक्टर के पास तब लेजाते है जब स्थिति लगभग नियंत्रण से बेकाबू हो जाती है, केंसर संस्थान की इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल सामने आरहे साढ़े बारह लाख नए रोगियों में से लगभग सात लाख महिलाएं होती है। प्रतिवर्ष लगभग इनमें से आधी लगभग साढ़े तीन लाख महिलावों की, यानि आधी की मौत हो जाती है जो आधी आबादी के हिसाब से काफी चिंता जनक है । इनमें से भी 90 प्रतिशत की मृत्यु का कारण रोग के प्रति बरते जाने वाली अगंभीरता है ये महिलाएं डॉक्टर के पास तभी जाती है जब बीमारी अनियंत्रण की स्थिति में पहुच जाती है या बेहद गंभीर स्थिति में पहुच जाती है। ऐसी स्थिति में यह बीमारी लगभग लाइलाज हो चुकी होती है।

भारतवासियों के लिए यह बात सकून देने वाली हो सकती है की जागरूकता के अभाव के बावजूद भारत में यूरोपीय देशों के मुक़ाबले केंसर नमक इस बीमारी के विस्तार की दर धीमी है देश और दुनिया मे नित्य प्रतिदिन तकनीकी के विकास के बाद भी दुनिया में केंसर से मरने वालों की संख्या में कोई कमी नही आ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्राप्त आकड़ों के अनुसार सन 2007 में केंसर से विश्व भर में 79 लाख लोग मौत के शिकार हुये थे इस दर मे वर्ष 2030 तक 45 प्रतिशत बढ़ोतरी हो कर लगभग एक करोण 15 लाख हो जाने का अनुमान है वही इस दौरान केंसर के नए मामले वर्ष 2007 तक एक करोण तेरह लाख सामने आए थे जिसके वर्ष 2030 तक बढ़ कर एक करोड़ पचपन लाख हो जाने का अनुमान है।

केंसर जैसी जानलेवा बीमारी के अधिकाधिक विस्तार के पीछे मनुष्य की आधुनिक जीवन शैली और खान-पान की बुरी लत का विशेष योगदान है। आधुनिक जीवन शैली का आदमी पूरी तरह से आराम पसंद है, व्यायाम उसकी दिनचर्या से लगभग बाहर हो चुका है। वह किसी न किसी मादक पदार्थ के सेवन का आदि है जो व्यक्ति किसी प्रकार का धूम्रपान नहीं करता वह कम से कम चाय या काफी या दोनों के सेवन का आदि जरूर है। एक कप काफी या चाय में लगभग चार हजार से अधिक घातक तत्व पाये जाते है तंबाकू,शराब और सिगरेट सरीखे मादक पदार्थों के सेवन से केंसर नामक इस महामारी का तेजी से विस्तार होता है। इसके अलावा मोटापा को चलते भी इस बीमारी का तेजी से विस्तार हो रहा है। वैसे तो मोटापा को सारी बीमारियों की जड़ कहा जाता है, आकड़ों पर गौर करे तो केंसर से होने वाली मौतों में 22 प्रतिशत मौत के मामले तंबाकू के सेवन के कारण हो रहे है जबकि शराब के सेवन के कारण 33 लाख लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे है वही मोटापा के चलते 2 लाख 74 हजार लोग केंसर की चपेट में आ रहे है इसके अलावा खराब खान पान के चलते इसके चपेट में आने वालों का प्रतिशत 30 है ।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में 42 प्रतिशत पुरुष और 18 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू के सेवन के कारण केंसर का शिकार हो कर अपनी जान गवा चुके है। वही पूर्व के आकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो वर्ष 1990 के मुक़ाबले वर्तमान में प्रोस्टेड केंसर के मामले में 22 प्रतिशत और महिलावों में सरवाईकाल केंसर के मामले में 2 प्रतिशत और वेस्ट केंसर के मामले में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

ऐसा नही है की इस बीमारी से बचा नही जा सके . आधुनिक जीवन शैली और खान-पान में मामूली सुधार कर आसानी से इसकी चपेट में आने से बचा जा सकता है । बीमारी का शुरू में पता चल जाए और समय रहते लोग इसका उपचार शुरू करा दे तो आसानी से बचाव संभव है।

डॉ. सौरभ मालवीय

 

 

आज देश की सबसे लोकप्रिय कंपनी मारुति सुजुकी की स्विफ्ट डिजायर एलएक्सआई की लोकप्रियता देखते ही बनती है। यही कारण है कि इसकी वेटिंग अवधि बढ़ती ही जा रही है। गाड़ी की एक्सशोरूम कीमत 5 लाख 45 हजार रुपये है। जबकि यह 14 वेरिएंट में बाजार में उपलब्‍ध है तथा इसके टॉप मॉडल एएमटी जेडडीआई प्लस की कीमत 9.41 लाख रुपये एक्सशोरूम रखी गई है।

 इस कार की विशेषताओं के कारण लोग कंपनी से लम्‍बा इंतजार करने के बाद भी सिर्फ इसी गाड़ी को खरीदना चाहते हैं। स्विफ्ट डिजायर एलएक्सआई कार की खासीयत है कि 1.2 लीटर का पेट्रोल इंजन और 1.3 लीटर का मल्टीजेट डीजल इंजन इसमें दिया गया है। जिसमें कि 1.2 लीटर का इंजन इसे 85 हॉर्सपावर की ताकत प्रदान करता है। दूसरी ओर 1.3 लीटर का मल्टीजेट इंजन इसे 75 हॉर्सपावर की ताकत प्रदान करता है।

बतादें कि कार की लंबाई यथावत है और कार के एक्सटीरियर में जरूरी बदलाव किए गए हैं।

कई धनाड्य वर्ग के युवाओं की अपनी पसंद के अनुरूप हाई प्रोफाइल गाड़ी टेस्ला जोकि भारत में लांच होने के बाद मध्‍यमवर्गियों की पहुंच में आ जानेवाली थी अब बाजार में जल्‍द आनेवाली नहीं है । कलोगों ने खासकर मध्‍यमवर्गीय युवाओं ने इस गाड़ी को लेकर खासी उम्‍मीदें पाल रखी थी कि यह गाड़ी जल्‍द ही उन्‍हें मिल जाएगी और वे ड्राइव का मजा ले सकेंगे, किंतु अब उन्‍हें कुछ समय ओर रुकना होगा, यह हम नहीं कह रहे, बल्कि इस बारे में  हाल ही में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क का बयान जारी हुआ है, जिसमें उन्‍होंने कहा है कि टेस्ला मॉडल 3 फिलहाल भारत नहीं आ रही।

गौरतलब है कि मस्क ने टेस्ला कार के भारत में साल 2017 तक आने की उम्मीद जताई थी।
इस संबंध में जब मस्क से ट्विटर पर भारत में मॉडल 3 की लॉन्चिंग को लेकर लोगों ने सवाल किए तो जवाब में टेस्ला सीईओ ने बताया कि 30 प्रतिशत पार्ट्स लोकल हिस्सों के हैं, जिनकी सप्लाई भारत में करवाना अभी मुमकिन नहीं है।


हालांकि, अभी यह भी नहीं कहा जा सकता कि लॉन्च कैंसल हो गया है। कहा जा रहा है कि थोड़ा देर से ही सही, टेस्ला की यह सस्ती कार भारत में आएगी जरूर। इसके यूनिट को लेकर कंपनी प्रयास कर रही है कि किस तरह भारत में इसकी सप्लाई को सुगम बनाया जा सके।

बतादें कि कंपनी लगभग 1 साल पहले कह चुकी थी कि मॉडल 3 जल्द भारत आएगा और कुछ भारतीयों ने तो बुकिंग भी करवा ली थी। भारतीय कार उपभोक्‍ताओं को उम्‍मीद थी कि इसके यहां आने से इलेक्ट्रिक कारों के मार्किट में बूम आ जाएगा । पर अपने कहे अनुसार इंडिया में टेस्ला अपनी यह गाड़ी नहीं उतार पा रही है ।

नयी दिल्ली । प्रीमियम वर्ग के यात्री वाहन बनाने वाली कंपनी निसान इंडिया की बीते दो माह पूर्व भारतीय बाजार में उतारी गई लग्‍जरी स्पोर्ट यूटिलिटी वाहन (एसयूवी) टेरैनो लगता है उपभोक्‍ताओं को भा गई है, तभी तो यह गाड़ी देशभर में लगातार उपभोक्‍ताओं द्वारा खरीदी जा रही हैं । बतादें कि इसकी दिल्ली में एक्स शो रूम कीमत 9.99 लाख रुपये से लेकर 14.20 लाख रुपये तक है।

कंपनी के अध्यक्ष गुलियाम सिकार्ड का कहना है कि 22 नये फीचर के साथ ही आंतरिक और बाहरी साज सज्जा में बदलाव के साथ नया टेरैनो पेश किया गया था, जिसके बाद से कंपनी को इस गाड़ी की बिक्री को लेकर खासी उम्‍मीदें थीं और आज यह अपनी उम्‍मीदों पर खरी उतर रही है।

इन कारणों से है टेरैनो विशेष

इसमें सात इंच का टच स्क्रीन नेविगेशन दिया गया है और स्टियरिंग में ही ऑडियो और फोन कंट्रोल करने के साथ ही क्रुज कंट्रोल भी दिया गया है। इसे मेड इन इंडिया एसयूवी के अनुरूप बदलाव कर पेश किया गया है ताकि यह भारतीय सड़कों पर बेहतर चल सके। इसके अब तक पांच मॉडल पेश किये गए हैं । जिसमें कि एक्स एल की कीमत 9.99 लाख रुपये, एक्सईडी 9.99 लाख रुपये, एक्सएलडी (ओ) 11.92 लाख रुपये, एक्सवीडी प्री 13.60 लाख और एक्सपीडी प्री एएमटी 14.20 लाख रुपये

 

नयी दिल्ली । यात्री वाहन बनाने वाली देश की दूसरी बड़ी कंपनी हुंडई मोटर इंडिया ने भारत के साथ ही वैश्विक स्तर पर आज से एक माह पूर्व अपनी नयी एक्सेंट कार पेश की थी, उस समय कंपनी को भी उम्‍मीद नहीं थी कि इसकी आनेवाले दिनों में इतनी अधिक बाजार से डिमांड आ जाएगी । बतादें कि देश की राजधानी दिल्ली में गाड़ी की एक्स शोरूम कीमत 5,38,381 रुपये से लेकर 8,41,670 रुपये तक रखी गई है।

कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकरी वाई.के. कू का इस बारे में कहना है कि उनकी कंपनी हमेशा मांग में हो रहे बदलाव और ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुये कारें पेश करती रही है। जिसके तहत ही एक्सेंट को उन्नत बनाकर पेश किया गया।

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में पेश किये जाने के बाद से यह गाड़ी 2.5 लाख बिक्री का अपना पहले ही रिकार्ड बना चुकी है और अब आई इसकी नयी कार भी अपनी लोकप्रियता को छू रही है ।

ये है गाड़ी की खासियत

इसमें 1.2 लीटर कप्पा डुअल वीटीवीटी पेट्रोल और 1.2 लीटर यू 2 डीजल इंजन है। जिसमें कि पेट्रोल इंजन मैनुअल ट्रांसमिशन में 20.14 किलोमीटर तथा ऑटो ट्रांसमिशन में 17.36 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है।इसी तरह से डीजल इंजन मैनुअल ट्रांसमिशन में 25.4 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता है। इसके साथ ही गाड़ी में दो एयरबैग दिये गये हैं। वहीं इसमें हाईटेक का उपयोग करते हुये सात इंच का टच स्क्रीन डिस्प्ले दिया गया है। इसके साथ ही रियर पार्किंग कैमरा और रियल एसी वेंट भी है।

अभी यह कार भारतीय बाजार में पेट्रोल इंजन में छह तथा डीजल में पांच मॉडलों में उपलब्ध है। पेट्रोल कार की दिल्ली में एक्स शोरूम कीमत 5,38,381 रुपये से लेकर 7,09,916 रुपये तक है जबकि डीजल कार की कीमत 6,28,281 रुपये से लेकर 8,41,670 रुपये तक है।

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नई दिल्ली । इलेक्ट्रिक कारों के बूम की संभावनाओं को देखते हुए अब स्कोडा इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार बनाने पर विचार कर रही है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि यह कार साल 2025 तक बाजार में आ जाएगी। स्कोडा ने खुलासा किया कि एमईबी इलेक्ट्रिकल इस स्पोर्ट्स कार के मैकेनिकल बिट्स तैयार करेगा। माना जा रहा है कि पावर और डायनेमिक्स के पहलू पर यह ढांचा कंपनी को खासा मदद प्रदान करने वाला है।

यह बहुत अच्छी बात है कि इसमें जितनी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी उतना ही कारों के सस्ता होने के चांस है। गौरतलब है कि पिछले महीने स्कोडा ने विजन ई कॉन्सेप्ट कार शोकेस की थी, जिसमें 2 इलेक्ट्रिक मोटर्स दिए गए थे। यह कार 302 बीएचपी का पावर जेनरेट कर सकती है व इसमें 4-वील ड्राइव फीचर दिया गया था।

वहीं इस कॉन्सेप्ट पर दावा किया गया था कि यह 6 सेकंड में 0-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। एमईबी प्लैटफॉर्म की मदद से स्कोडा को अपनी इलेक्ट्रिक कार्स रियर वील ड्राइव पर लाने में भी मदद मिलेगी।

जर्मन कार निर्माता बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज-बेंज ने दक्षिण कोरिया में जनवरी से अप्रैल की अवधि में जापान की तुलना में अधिक वाहन बेचे, एक उद्योग के आंकड़ों ने 21 मई को दिखाया।
कोरिया ऑटोमोबाइल आयातकों और वितरक एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज-बेंज की वाहन बिक्री क्रमश: 48 प्रतिशत और 32 प्रतिशत सालाना सालाना क्रमशः 18,115 और 24,877 इकाइयों को कोरियाई बाजार में पहले चार महीनों में बढ़ी है।
यह पहली बार है कि दो जर्मन कार निर्माता जापान की तुलना में दक्षिण कोरिया में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऑडी-वोक्सवैगन ग्रुप के उत्सर्जन घोटाले से उत्क्रमण का मुख्य रूप से प्रभावित है
पिछले साल जुलाई में ऑडी-वोक्सवैगन समूह ने स्वैच्छिक तौर पर अपने वाहनों को कोरिया में बेचना बंद कर दिया था क्योंकि सियोल सरकार ने घोषणा की थी कि वे सभी ऑडी और वोक्सवैगन कारों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा लेंगे जबकि जर्मन कार निर्माता पर भारी जुर्माना लगाएगा, इसकी कुछ डीजल-संचालित कारों में परीक्षण
जनवरी से अप्रैल तक जापान आयात बाजार के आकार के अनुसार दक्षिण कोरिया से आगे था। आयातित कार निर्माता जापान में चार माह के दौरान 96,877 वाहन बेचे, एक साल पहले की तुलना में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कोरिया में 75,017 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो सालाना आधार पर 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

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Vol 19.92M Avg Vol 24.99M
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