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मुंबई । एशियाई बाजारों में बढ़त के साथ कारोबार देखने को मिल रहा है। जापान का बाजार निक्कई 0.1 फीसदी गिरा है, लेकिन हैंग सेंग 60 अंक बढ़कर 25,450 के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं एसजीएक्स निफ्टी 26.5 अंक की तेजी के साथ 9,475.5 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

स्ट्रेट्स टाइम्स में 0.4 फीसदी की मजबूती दिख रही है, जबकि कोरियाई बाजार का इंडेक्स कोस्पी 0.7 फीसदी तक मजबूत हुआ है। ताइवान इंडेक्स में 0.15 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। शंघाई कम्पोजिट में 0.2 फीसदी की कमजोरी दिख रही है।

मुंबई। वैश्विक बाजारों से मिले खराब संकेतों के कारण देश के शेयर बाजारों में मंगलवार के कारोबारी दिन कमजोरी के साथ कारोबार देखने को मिल रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी में 0.5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। कमजोरी के इस माहौल में निफ्टी 9400 के करीब आ गया है, जबकि सेंसेक्स में 100 अंकों की गिरावट आई है।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार बिकवाली दिख रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 1.6 फीसदी गिर गया है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में भी 1.5 फीसदी की कमजोरी आई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 1.5 फीसदी लुढ़क गया है।

फार्मा, मेटल, एफएमसीजी, कंज्यूमर डयुरेबल्स, पावर और ऑयल एंड गैस शेयरों में बिकवाली हावी हुई है। बैंक निफ्टी 0.4 फीसदी गिरकर 22,565 के स्तर पर आ गया है। हालांकि आईटी शेयरों में अच्छी खरीदारी नजर आ रही है। बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 105 अंक की गिरावट के साथ 30,466 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 42 अंक की कमजोरी के साथ 9,396 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। 

बाजार में कारोबार के इस दौरान दिग्गज शेयरों में सन फार्मा, गेल, अरविंदो फार्मा, अदानी पोर्ट्स, सिप्ला और एसबीआई 5.7-2.2 फीसदी तक टूटे हैं। हालांकि दिग्गज शेयरों में मारुति सुजुकी, एचसीएल टेक, टीसीएस, एचडीएफसी, विप्रो और एचयूएल 1.25-0.6 फीसदी तक बढ़े हैं। 

मिडकैप शेयरों में वीडियोकॉन, रिलायंस कम्युनिकेशंस, हैवेल्स इंडिया, अदानी पावर और बैंक ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा 20-4 फीसदी तक कमजोर हुए हैं। स्मॉलकैप शेयरों में भूषण स्टील, डेन नेटवर्क्स, तानला सॉल्यूशंस, शक्ति पंप्स और सुप्रीम इंफ्रा सबसे ज्यादा 15.3-7.8 फीसदी तक लुढ़के हैं।

नई दिल्ली ।  पुरानी कंपनियां भारती एयरटेल, वोडाफोन तथा आइडिया ने मार्च में उचित लाइसेंस शुल्क नहीं दिया जिससे सरकार को 400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। यह आरोप रिलायंस जियो ने दूरसंचार मंत्रालय के समक्ष शिकायत दर्ज कर लगाया है। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी ने आरोप लगाया कि उक्त तीनों कंपनियों ने लाइसेंस नियमों का उल्लंघन किया और जानबूझकर 2016-17 की अंतिम तिमाही का अग्रिम लाइसेंस शुल्क अनुमानित समायोजित सकल आय के आधार दिया जो तीसरी तिमाही से कम था।

लाइसेंस समझौते के तहत चौथी तिमाही की राशि तीसरी तिमाही के भुगतान से कम नहीं होनी चाहिए। शिकायतकर्ता के अनुसार एयरटेल ने जनवरी-मार्च 2017 के लिये लाइसेंस शुल्क के रूप में करीब 950 करोड़ रुपए का भुगतान किया। जियो का आरोप है कि यह राशि एयरटेल द्वारा अक्टूबर-दिसंबर 2017 में दिए गए 1,099.5 करोड़ रुपए के लाइसेंस शुल्क से 150 करोड़ रुपए कम है। 

नियमों के तहत दूरसंचार परिचालक को जनवरी-मार्च अवधि के लिये लाइसेंस शुल्क का भुगतान अनुमानित राजस्व के आधार पर करने की जरूरत थी लेकिन यह इसी वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में किये गये भुगतान से कम नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार जियो के अनुसार वोडाफोन ने 550 करोड़ रुपए का भुगतान किया जो तीसरी तिमाही में दिए गए 746.8 करोड़ रुपए के लाइसेंस शुल्क से 200 करोड़ रुपए कम है।

आइडिया ने तीसरी तिमाही में दिए गए 609.4 करोड़ के मुकाबले 70 करोड़ रुपए कम शुल्क का भुगतान किया। जियो का आरोप है कि इससे सरकारी खजाने को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

नई दिल्‍ली । मूल्‍य आधारित नीलामी के जरिए 3,000 करोड़ रुपये (सांकेतिक) की अधिसूचित राशि के लिए ‘भारत सरकार फ्लोटिंग रेट बांड 2024’एवं मूल्‍य आधारित नीलामी के जरिए 8,000 करोड़ रुपये (सांकेतिक) की अधिसूचित राशि के लिए ‘6.79 प्रतिशत ब्याज वाले सरकारी स्टॉक 2027’ और मूल्‍य आधारित नीलामी के जरिए 2,000 करोड़ रुपये (सांकेतिक) की अधिसूचित राशि के लिए ‘7.73 प्रतिशत ब्याज वाले सरकारी स्टॉक 2034’ तथा मूल्‍य आधारित नीलामी के जरिए 2,000 करोड़ रुपये (सांकेतिक) की अधिसूचित राशि के लिए ‘7.06 प्रतिशत ब्याज वाले सरकारी स्टॉक 2046’ को लेकर भारत सरकार ने फ्लोटिंग रेट बांडों और सरकारी स्‍टॉक की बिक्री (पुनर्निर्गम) करने की घोषणा की है ।

भारतीय रिजर्व बैंक के मुम्‍बई कार्यालय द्वारा ये नीलामियां 26 मई, 2017 (शुक्रवार) को आयोजित की जाएंगी, जिसके लिए एकाधिक मूल्य विधि का उपयोग किया जाएगा। जिसमें कि सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी से जुड़ी गैर-प्रतिस्‍पर्धी बोली सुविधा की योजना के अनुसार स्‍टॉक की बिक्री की अधिसूचित राशि के 5 प्रतिशत तक का आवंटन पात्र व्‍यक्तियों एवं संस्‍थानों को किया जाएगा।

 इस संबंध में बताया गया है कि नीलामी के लिए प्रतिस्‍पर्धी एवं गैर-प्रतिस्‍पर्धी दोनों ही बोलियां 26 मई, 2017 को भारतीय रिजर्व बैंक के कोर बैंकिंग सोल्‍यूशन (ई-कुबेर) सिस्‍टम पर इलेक्‍ट्रॉनिक प्रारूप (फॉर्मेट) में पेश की जानी चाहिए। गैर-प्रतिस्‍पर्धी बोलियां प्रात: 10.30 बजे से लेकर प्रात: 11.30 बजे तक और प्रतिस्‍पर्धी बोलियां प्रात: 10.30 बजे से लेकर दोपहर 12.00 बजे तक पेश की जानी चाहिए।

 इन नीलामियों के नतीजों की घोषणा 26 मई, 2017 को ही कर दी जायेगी और सफल बोली लगाने वालों द्वारा भुगतान 29 मई, 2017 (सोमवार) को किया जायेगा। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप ये स्‍टॉक ‘व्‍हेन इश्‍यूड’ ट्रेडिंग के लिए पात्र माने जाएंगे। इसके लिए दिनांक 16 नवंबर, 2006 को जारी परिपत्र संख्‍या आरबीआई/2006-07/178 देखें, जिसमें समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं।

भारत में इन दिनों विदेशी पर्यटकों की वृद्ध‍ि दर में तेजी से इजाफा हो रहा है । देखाजाए तो जब से केंद्र में भाजपानीत मोदी सरकार आई है, तभी से लगातार आ रहे आंकड़े इस दिशा में चौकानेवाले हैं, क्‍योंकि इसके बाद से देखने में आ रहा है कि विदेशियों को भारत कुछ ज्‍यादा ही रास आ रहा है । इस संबंध में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ओर से रुपये एवं डॉलर दोनों ही लिहाज से भारत में हर महीने पर्यटन के जरिए विदेशी मुद्रा आमदनी (एफईई)  का आकलन करते हुए आंकड़े जारी किए गए हैं, जोकि भारतीय रिजर्व बैंक के भुगतान संतुलन से जुड़े यात्रा प्रमुख के आंकड़ों पर आधारित हैं।

 इसके अनुसार वर्ष 2016 और जनवरी-मार्च 2017 की एफईई (रुपये एवं डॉलर दोनों ही लिहाज से) में संशोधन किया गया है। वर्ष 2016 के विदेशी पर्यटक आगमन के अंतिम आंकड़े को अपनाने के मद्देनजर यह संशोधन किया गया है। वहीं अप्रैल, 2017 और जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान भारत में पर्यटन से एफईई के अनुमानों की मुख्‍य बातें निम्‍नलिखित हैं –

 पर्यटन से विदेशी मुद्रा आमदनी (एफईई) (रुपये में)   

 अप्रैल, 2017 में एफईई 14,692 करोड़ रुपये रही, जबकि अप्रैल, 2016 में यह 11,495 करोड़ रुपये और अप्रैल, 2015 में 10,091 करोड़ रुपये थी। अप्रैल, 2016 के मुकाबले अप्रैल, 2017 में रुपये के लिहाज से एफईई की वृद्धि दर 27.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि अप्रैल, 2015 के मुकाबले अप्रैल, 2016 में यह वृद्धि 13.9 प्रतिशत आंकी गई थी। जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान एफईई 18.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 61,605 करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि जनवरी-अप्रैल 2015 की तुलना में जनवरी-अप्रैल 2016 में यह 15.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 51,812 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी।

 

पर्यटन से विदेशी मुद्रा आमदनी (एफईई) (अमेरिकी डॉलर में)

अप्रैल, 2017 के दौरान अमेरिकी डॉलर के लिहाज से एफईई 2.278 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई, जबकि यह अप्रैल 2016 में 1.726 अरब अमेरिकी डॉलर और अप्रैल 2015 में 1.609 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज की गई थी। अप्रैल 2016 के मुकाबले अप्रैल 2017 में अमेरिकी डॉलर के लिहाज से एफईई की वृद्धि दर 32.0 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल 2015 की तुलना में अप्रैल 2016 में यह वृद्धि 7.3 प्रतिशत रही थी।

जबकि जनवरी-अप्रैल 2017 के दौरान एफईई 20.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9.275 अरब अमेरिकी डॉलर आंकी गई, जबकि जनवरी-अप्रैल 2015 की तुलना में जनवरी-अप्रैल 2016 में यह 6.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7.697 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज की गई थी।   

 

दिल्‍ली । भारत संसाधनों की दृष्‍ट‍ि से कितना समृद्ध है इसका अंदाजा आप सिर्फ खनिज क्षेत्र के आंकड़ें देखकर ही लगा सकते हैं । केंद्र सरकार की ओर से इस बात के आंकड़े जारी किए गए हैं, जिन्‍हें सभी को जरूर जानना चाहिए । मार्च 2017 (नई सीरीज (2011-12=100) में खनन एवं उत्खनन क्षेत्र का खनिज उत्पादन सूचकांक 127.2 अंक रहा, जो मार्च 2016 के मुकाबले 9.7 फीसदी ज्यायदा है। वर्ष 2016-17 की अप्रैल–मार्च अवधि में इस क्षेत्र की संचयी वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.3 फीसदी रही।

 उधर, खनिज मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि मार्च, 2017 के दौरान देश में कुल मिलाकर 26350 करोड़ रुपये मूल्य के खनिजों का उत्पादन हुआ, जिसमें परमाणु एवं लघु या गौण खनिज शामिल नहीं हैं। इसमें कोयले का सर्वाधिक 11658 करोड़ रुपये (44 फीसदी) का योगदान रहा। इसके बाद अहमियत के लिहाज से क्रमश: इन खनिजों का योगदान रहा: पेट्रोलियम (कच्चा)- 5616 करोड़ रुपये, लौह अयस्क- 2960 करोड़ रुपये, प्राकृतिक गैस (उपयोग की गई) - 2214 करोड़ रुपये, लिग्नाइट- 996 करोड़ रुपये और चूना पत्थर- 639 करोड़ रुपये। मार्च, 2017 के दौरान खनिजों के कुल उत्पादन में मूल्य के लिहाज से इन छह खनिजों का कुल योगदान तकरीबन 91 फीसदी का रहा।

 वहीं, मार्च, 2017 में महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन कुछ इस प्रकार रहा: कोयला- 770 लाख टन, लिग्नाइट- 55 लाख टन, प्राकृतिक गैस (उपयोग की गई)- 2677 मिलियन क्यूबिक मीटर, पेट्रोलियम (कच्चा)- 31 लाख टन, बॉक्साइट- 1875 हजार टन, क्रोमाइट-793 हजार टन, कॉपर कॉन्स. (तांबा सान्द्र)- 13 हजार टन, सोना - 127 किलो, लौह अयस्क- 196 लाख टन, सीसा सान्द्र- 31 हजार टन, मैंगनीज अयस्क- 298 हजार टन, जिंक कॉन्स (जस्ता सान्द्र)- 181 हजार टन, एपेटाइट और फॉस्फोराइट- 108 हजार टन, चूना पत्थर- 304 लाख टन, मैग्नेसाइट- 17 हजार टन और हीरा – 5026 कैरेट।

 गौरतलब है कि मार्च 2017 के दौरान महत्वपूर्ण खनिजों की उत्पादन वृद्धि दर मार्च, 2016 की तुलना में सकारात्मक या धनात्मक रही। इनमें क्रोमाइट (85.4%), जस्ता सान्द्र (41.4%), हीरा (25.5%), एपेटाइट और फॉस्फोराइट (17.0%), मैंगनीज अयस्क (12.3%), लौह अयस्क (11.7%), सीसा सान्द्र (11.5%), कोयला (10.9%), उपयोग की गई प्राकृतिक गैस (9.9%), चूना पत्थर (4.2%) और कच्चा पेट्रोलियम (0.9%) शामिल हैं। कई अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की उत्पादन वृद्धि दर नकारात्मक रही। इनमें मैग्ने्साइट (-34.7%), सोना (-13.6%), तांबा सान्द्र (-6.5%), लिग्नाइट (-4.2%) और बॉक्साइट (-4.0%) शामिल हैं।

 

नई दिल्‍ली । वर्ष 2010-11 की अप्रैल-जून अवधि (प्रथम तिमाही) से ही वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के बजट प्रभाग का सार्वजनिक ऋण प्रबंधन कार्यालय (पीडीएमसी) (पूर्ववर्ती मध्‍य कार्यालय) नियमित रूप से ऋण प्रबंधन पर तिमाही रिपोर्ट जारी करता रहा है। इसी के तहत केंद्र सरकार ने जनवरी-मार्च 2017 की तिमाही (वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही) रपट जारी की है।

 

जिसमें बताया गया है कि वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही के दौरान सरकार ने 80,000 करोड़ रुपये मूल्‍य की दिनांकित प्रतिभूतियां जारी कीं, ताकि वित्‍त वर्ष 2017 के लिए 582000 करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) की उसकी उधारियां पूरी की जा सकें। वित्‍त वर्ष 2017 के लिए सरकार की सकल एवं शुद्ध बाजार उधारी संबंधी आवश्‍यकताओं को संशोधन के बाद कम करके क्रमश: 582000 करोड़ एवं 406708 करोड़ रुपये कर दिया गया, जो वित्‍त वर्ष 2016 के मुकाबले क्रमश: 0.52 फीसदी तथा 8.34 फीसदी कम है। वित्‍त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही के दौरान सरकारी दिनांकित प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिलों दोनों की ही नीलामियां सहजता के साथ संपन्‍न हुईं।   

 

केंद्र सरकार के सार्वजनिक ऋण (‘सार्वजनिक खाते’ के तहत देनदारियों को छोड़कर) में वित्त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही के दौरान तिमाही आधार पर अनंतिम रूप से 1.9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। आंतरिक कर्ज मार्च 2017 के आखिर में सार्वजनिक ऋण का 92.6 प्रतिशत था, जबकि विपणन योग्‍य प्रतिभूतियां सार्वजनिक ऋण का 83.2 प्रतिशत आंकी गईं।

 

 वित्‍त वर्ष 2017 की चौथी तिमाही के दौरान संपूर्ण आधार पर सरकारी प्रतिभूतियों का कुल कारोबार पिछली तिमाही की तुलना में 39.32 प्रतिशत घट गया।

नयी दिल्ली । गेल (इंडिया) लिमिटेड जो सार्वजनिक क्षेत्र की गैस प्रसंस्करण एवं वितरण कंपनी है का इस साल का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की तुलना में घट गया है । यह 31 मार्च को समाप्त बीते वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 68.74 प्रतिशत घटकर 260.16 करोड़ रुपये रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 की समान तिमाही में उसे 832.13 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था।

इसे लेकर आंकड़े कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक के बाद आए हैं, जिसमें कि कहा गया है कि एनटीपीसी के साथ संयुक्त उपक्रम वाली कंपनी रत्नागिरी गैस एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड की परिसंपत्तियों के इंपेयरमेंट ऑफ एसेट्स के मद में 783 करोड़ रुपये का प्रावधान करने के कारण से उसके लाभ में भारी असर हुआ है और वह कम होता गया है।

इसके बाद अब निर्देशक मंडल ने तय किया है कि दोनों कंपनियों से रत्नागिरी गैस एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड के कारोबारों को अलग-अलग करके दो अलग कंपनियाँ बनाई जाएं, जिससे कि पिछले घाटे को कम किया जाए और भविष्‍य में लाभ की स्‍थ‍िति में पहुंचा जा सके ।

मुम्‍बई । दुनियाभर में परिधान बनाने एवं उसे डिजायन करने के क्षेत्र में प्रसिद्ध भारतीय कंपनी रेमंड खादी को प्रोत्‍साहन देने के लिए आगे आई है । खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के साथ उसने एक समझौता किया है सिके तहत आनेवाले अगस्‍त माह से रेमण्‍ड केवीआईसी के साथ साझेदारी के तहत अपना ब्रांडेड खादी के परिधान आरंभ करेगी और इसे वह वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहन देगी।

 

रेमंड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गौतम हरि सिंघानिया ने इस संबंध में दिए अपने एक बयान में बताया है कि हमारी कंपनी ने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग से खादी को विश्‍वस्‍तर पर प्रोत्‍साहित करने के लिए बात की, जिसके बाद (केवीआईसी) ने रेमंड को ग्रामीण उद्योगों और हस्तशिल्पों के खादी तथा खादी उत्पादों के संवर्धन एवं विपणन की अनुमति दी है और पीपीपी मॉडल के जरिए स्थापित विपणन एजेंसियों के साथ साझेदार की है।

 

उन्‍होंने बताया कि इस साझेदारी के अंतर्गत रेमंड पांच सालों के लिए खादी एवं खादी उत्पादों की खरीददारी करेगी, जिसमें कि प्राथमिक रूप से सूती, उनी कपड़े और रेशमी कपड़े शामिल किए गए हैं । यह नया लेबल देशभर में रेमंड के 350 से अधिक दुकानों के अलावा केवीआईसी दुकानों पर और जाने माने ई-वाणिज्य पोर्टलों पर इस साल दो माह बाद से उपलब्ध करा दिया जाएगा ।

भोपाल । देश में गुड्स एवं सर्विस टैक्स लागू होने के बाद बाजार में चाय सस्ती हो सकती है । यह कहना है प्रसिद्ध चाय निर्माता कंपनी मोहिनी टी के डायरेक्टर सुरेश चंद्र अग्रवाल का । वे आज एक दिन के प्रवास पर भोपाल आए थे । यहां उन्‍होंने कंपनी की डिस्ट्रीब्यूटर मीटिंग में हिस्सा लिया । 

अग्रवाल का कहना है कि नोटबंदी के बाद से चाय उद्योग की आर्थिक स्थिति खराब है। किंतु इसके बाद में मोहिनी टी ने अपनी स्थिति को बेहतर बनाए रखा है। उनका कहना था कि जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स में जो परिवर्तन आ रहे हैं उससे खपत वाले राज्यों में चाय की कीमत कम होगी ।

नई दिल्ली रक्षा क्षेत्र में देसी निजी भागीदारी और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की बैठक में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप पॉलिसी को मंजूरी दे दी गई है। अब कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीआई) इस पॉलिसी को अंतिम मंजूरी देगी।

उधर, इसके साथ ही सेना को 39 चॉपर्स खरीदने को हरी झंडी दिखाई गई है। सेना को मॉडर्नाइजेशन के लिए भी हरी झंडी दी गई है। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा। 4 बड़े रक्षा क्षेत्र मेक इन इंडिया के लिए खोल दिए गए हैं।

उल्‍लेखनीय है कि चार नए खोले गए क्षेत्रों में जेट, हेलीकॉप्टर, पनडुब्बी और टैंक शामिल हैं। सरकार के कदम से देश में ज्यादा फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर, पनडुब्बी और टैंक बनेंगे। घरेलू कंपनियां विदेशी कंपनियों से हाथ मिलाएंगी और विदेशी ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (ओईएम )से तकनीकी सहारा लेंगी।

नई दिल्ली । दुनिया के 50 शीर्ष लग्जरी उत्पादों के ब्रांड में भारत की तीन कंपनियों को भी शामिल किया गया है। ग्लोबल पावर्स आफ लग्जरी गुड्स की रिपोर्ट के चौथे सालाना संस्करण में इस बात की जानकारी दी गई है कि दुनिया के 50 शीर्ष लग्जरी ब्रांड्स में भारत की यह तीन कंपनियां दुनियाभर में अपनी लोकप्रियता को लेकर काफी दखल रखती है ।

जिन कंपनियों को ग्लोबल पावर्स आफ लग्जरी गुड्स ने अपने अध्‍ययन के दौरान सबसे आगे पाया उनमें गीतांजलि जेम्स, टाइटन व पीसी जूलर्स प्रमुख कंपनियां शामिल बताई जाती है।

बतादें कि इस सूची में लुइस वुइतोन को पहला स्थान दिया गया है।

धर, भारतीय कंपनी गीतांजलि जेम्स को 30वें, टाइटन को 31वें तथा पीसी जूलर्स को 44वें स्थान पर रखा गया है।

शोध फर्म डेलाइट का कहना है कि शहरी मध्यम वर्ग की आय में तीव्र बढोतरी तथा खर्च योग्य आय बढ़ने के कारण भारत में लग्जरी वस्तुओं के बाजार में वृद्धि की उम्मीद है । लागातार भारत में पर्चेसिंग केपेसिटी लोगों की बढ़ रही है ।

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