डायबिटीज नहीं चाहिए तो ये न करें

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आज दिनों दिन डायबिटीक लोगों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हो रहा है । कल तक ये अमीर देशों में होने वाली अमीरों की बिमारी कहलाती थी किंतु वर्तमान में भारत जैसे विकासशील देशों तथा बहुत गरीब देशों में भी तेजी से फेल रही है । इसका यदि कारण देखें तो सीधा है, वह है अनियमित दिनचर्या और खान-पान के कारण लोग डायबिटीज का शिकार हो रहे हैं। डायबिटीज का प्रमुख कारण मोटापा है।

डायबिटीज में खून में शुगर की मात्रा बढ जाती है। वैसे इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है परन्तु जीवनशैली में सुधार कर डायबिटीज से बचा जा सकता है। भारत में 61 मिलियन लोग मधुमेह से पीडि़त हैं। हर 10 सेकण्ड में मधुमेह के एक मरीज बढ़ते हैं। आंकड़ों के अनुसार 2030 तक भारत में डायबिटीज से पीडि़त मरीजों की संख्या 100 मिलियन हो जायेगी।

इस प्रकार भारत विश्व का सबसे ज्यादा डायबिटीज पीडि़त मरीजों वाला देश बन जायेगा।बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सक डा. मनोज अग्रवाल ने बताया कि हाल ही में प्रकाशित एक अमेरिकन रिपोर्ट के मुताबिक केवल हप्ते में एक बार नाश्ता छोड़ने से टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है।

डा. अग्रवाल ने बताया कि डायबीटीज खास तौर से दो तरह की होती है। पहली इंसुलिन आधारित डायबीटीज। इसमें इंसुलिन हॉर्मोन बनना पूरी तरह से बंद हो जाता है। ऐसे में शरीर में ग्लूकोज की बढ़ी हुई मात्रा को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत होती है। इसके अलावा दूसरी है बिना इंसुलिन आधारित डायबीटीज। इसमें इंसुलिन कम मात्रा में बनता है या पैंक्रियाज सही से काम नहीं कर रहा होता है।

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